प्रेट्र, नई दिल्ली। जब आप घर से बाहर जाते हैं, तो सीसीटीवी कैमरों के जरिए अपने घर पर नजर रखते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि अस्पताल से बाहर आने के बाद आपकी सेहत पर कौन नजर रखता है? इसी बड़ी चिंता को खत्म करने के लिए भारत ने चिकित्सा की दुनिया में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है।
दुनिया में पहली बार, भारत ने ‘डॉक्टर के नेतृत्व वाला’ एक ऐसा अनोखा एआई (AI) सिस्टम लॉन्च किया है, जो अस्पताल से दूर रहने पर भी आपकी सेहत की पहरेदारी करेगा। अब आपको अपनी बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह नई तकनीक 24 घंटे सातों दिन एक ‘अदृश्य डॉक्टर’ की तरह आपका ख्याल रखेगी।

(Image Source: AI-Generated)
‘आइलाइव कनेक्ट’ इस पूरे इकोसिस्टम का मुख्य हिस्सा है। यह एक छोटा सा वायरलेस ‘बायोसेंसर पैच’ है, जो एक कलाई बैंड के साथ जुड़ा होता है। इसे मरीज को पहनना होता है। यह डिवाइस लगातार शरीर की महत्वपूर्ण गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है।
कार्डियोसर्जन और इस तकनीक के संस्थापक डॉ. राहुल चंदोला के अनुसार, यह डिवाइस मरीज का सारा डाटा वायरलेस तरीके से एक सुरक्षित ‘क्लाउड प्लेटफॉर्म’ पर भेजता है। वहाँ से यह जानकारी सीधे एक ‘मेडिकल कमांड सेंटर’ तक पहुंचती है। सबसे खास बात यह है कि इस कमांड सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टर 24 घंटे मौजूद रहते हैं, जो रियल-टाइम में मरीज की सेहत पर नजर रखते हैं।
पुरानी मशीनों के मुकाबले यह नई तकनीक बहुत आगे है। इसमें एआई (AI) आधारित ‘पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण’ का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि यह सिस्टम शरीर में होने वाले उन बहुत छोटे बदलावों को भी पकड़ लेता है, जो बीमारी की शुरुआत का संकेत देते हैं।
डॉ. चंदोला बताते हैं कि कई बार बीमारी के लक्षण बाहर दिखने से पहले ही शरीर के अंदर बदलाव शुरू हो जाते हैं। यह मशीन उन्हें पकड़ लेती है, जिससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकते हैं। इससे मरीज की हालत गंभीर होने से बच जाती है और उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ता।
अक्सर देखा गया है कि मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पर उसकी निगरानी नहीं हो पाती। डॉ. चंदोला का कहना है कि ज्यादातर गंभीर मेडिकल घटनाएं अस्पताल के अंदर नहीं, बल्कि घर पर होती हैं जब मरीज बिना डॉक्टरी देखरेख के होता है। ‘आइलाइव कनेक्ट’ इसी कमी को पूरा करता है। यह मरीज की गिरती हुई सेहत का पहले ही पता लगा लेता है, जिससे समय पर मेडिकल मदद मिल जाती है।
इस तकनीक की क्षमता को परखने के लिए एक अध्ययन किया गया। 10 सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम में 410 से ज्यादा मरीजों के डाटा की जांच की गई। नतीजे बेहद सकारात्मक रहे:
आइलाइव कनेक्ट की सह-संस्थापक और वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार के अनुसार, यह तकनीक उन बुजुर्गों के लिए वरदान है जो अकेले रहते हैं। इसके अलावा, पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीज और हाल ही में अस्पताल से डिस्चार्ज हुए लोगों को इससे बहुत फायदा मिल रहा है। यह तकनीक एआई और डॉक्टरों की निगरानी का एक बेहतरीन मेल है, जो जान बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।