अब हर पल डॉक्टर साथ, AI तकनीक से घर बैठे होगी मरीज की 24×7 निगरानी

CNBC Awaaz

March 31, 2026

आम तौर पर अगर आप घर से दूर हों और घर की किसी भी गतिविधी पर नजर रखनी हो तो आप सीसीटीवी लगवाते हैं जिससे कि लाइव अपडेट रख सकें. आपने सोचा है कि ऐसा आपके स्वास्थ्य को लेकर भी क्या संभव है. AI ने ये कर दिखाया है. भारत ने दुनिया का पहला डॉक्टर के नेतृत्व वाला AI कंटीन्यूअस हेल्थकेयर इकोसिस्टम लॉन्च किया है. इसका मकसद अस्पताल से दूर अपने घर में बैठे मरीजों के हेल्थ की मॉनिटरिंग सातों दिन चौबीसों घंटे होते रहती है. जैसे ही शरीर को बीमार करने वाला बदलाव दिखता है मेडिकल कमांड सेंटर में बैठे डॉक्टर उनको और उनके रिश्तेदार को 2 मिनट के भीतर आगाह करते हैं और साथ में बताते हैं कि अभी क्या करना चाहिए. iLive Connect के फाउंडर कार्डियोसर्जन डॉ राहुल चंदोला ने बाताया कि इस तरह के डिवाइस से प्रिडिक्टिव मॉनिटरिंग के जरिए बीमारी का जल्दी और समय रहते पता लगाया जा सकता है और ये हॉस्पिटलाइजेशन में कमी लाने में काफी मददगार भी है.

24 घंटे रहती है मरीज पर नजर
डॉ राहुल ने कहा कि कमांड सेंटर में चौबीसों घंटे अत्यधिक विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहते हैं जो मरीज़ों की रियल टाइम में सक्रिय रूप से निगरानी करते हैं. पारंपरिक मॉनिटरिंग सिस्टम के विपरीत जो केवल लक्षण दिखने के बाद प्रतिक्रिया करते हैं, इसमें AI-संचालित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स शामिल है, जो सूक्ष्म शारीरिक परिवर्तनों का पता लगाने में सक्षम बनाता है जो क्लिनिकल लक्षण विकसित होने से बहुत पहले बीमारी की शुरुआत का संकेत दे सकते हैं.
मेडिकल इमरजेंसी से बचाव
डॉ विवेका ने कहा कि जिस तरह से डेटा कमांड सेंटर में आता है उसके आधार पर निर्णय लिया जाता है. उन्होंने बताया कि यदि किसी को नींद नहीं आती है और उसे एक नियत अवधी तक नींद की जरूरत है. ऐसे में यह डिवाइस यह भी बताता है कि किस दिन मरीज ने इतने घंटे जरूरत से कम सोया. इस तरह के छोटे से छोटे स्वास्थ्य संबंधी आंक़ड़ों के अध्ययन से किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से बचा जा सकता है. जिससे की बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता कम हो जाती है.

किन मरीजों को ज्यादा जरूरत?
डॉ राहुल चंदोला ने कहा कि बुजुर्ग, अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले मरीज और हेल्थ रिस्क वाले मरीजों के लिए iLive connect काफी कारगर है. अगर कोई मरीज अस्पताल से घर जाता है तो कई मरीजों को लगातार मेडिकल सुपरविजन की जरूरत होती है. ऐसे में किसी भी तरह के पहले शारीरिक गिरावट या वाइटल पैरामीटर में होने वाल बदलाव को तुरंत पकड़ लेता है.

क्या कहते हैं आंकड़े?
जानकारी के मुताबिक जिन मरीजों ने iLive Connect का इस्तेमाल किया उनके 10-सप्ताह के ऑब्जर्वेशनल अध्ययन के दौरान पता चला कि उनके बार बार हॉस्पिटल में दाखिल होने को लेकर 76% की कमी देखी गई. ये अध्ययन 410 मरीजों पर किया गया. इसमें हृदय संबंधी स्थितियों, ब्लड प्रेशर अस्थिरता, मेटाबॉलिक दिक्कत और डिस्चार्ज के बाद की जटिलताओं से संबंधित complications की जल्दी पहचान की गई. इस टेक्नोलॉजी से अकेले रहने वाले सीनियर सिटिजन्स, पुरानी बीमारियों वाले मरीज़ों और हाल ही में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए लोगों को खास फायदा हुआ है, जिनके लिए हॉस्पिटल की देखभाल के बाद घर पर आने का समय काफी नाज़ुक होता है.

About Author

CNBC Awaaz

Share This Post